संबंध के कई स्तर हैं

शरीर सब कुछ नहीं है 
कामुकता संबंध की शुरुआत मात्र है !
लेकिन कई लोग वहाँ अंत कर लेते हैं, 
और कई लोग कभी जान नहीं पाते 
कि भीतर और गहरी मुलाकात है, घनिष्ठता है !

अनेक लोग कभी नहीं जान पाते कि क्या होता है जब दो हृदय मिलते हैं। लोग यह तक नहीं जानते कि क्या होता है जब दो मन मिलते हैं। और जब दो प्राण मिलते हैं, एक ऐसा बिंदु है जहाँ दो किनारे एक-दूसरे के भीतर बस खो जाते हैं और कोई नहीं जानता कि कौन कौन है -- पुरूष स्त्री हो जाता है, स्त्री पुरूष हो जाती है; और प्रेम प्रार्थना बन जाता है।

अनेक लोग संबंध को शरीर के साथ खत्म कर लेते हैं; यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रेम अनेक द्वार खोल सकता है। यदि प्रेम है तो वह हमेशा अनेक द्वार खोलता है।

इसलिए जब तुम प्रेम में हो तब जितना अधिक हो सके उतना खुले रहो, जितना संभव हो उतना भयरहित रहो; ताकि प्रेम का तीर तुम्हारे बहुत भीतर तक उतर सके और उन पर्तों को छू सके जो कभी नहीं छुई गई !
परम प्यारे ओशो.....
गॉड इज नॉट फॉर सेल !